तिल-तिल करे देह के खंड,असुर भिडावें दुष्ट प्रचंड,
सिन्धु नीर से प्यास न जाए,तोह पण एक न बूंद लहे
शब्दार्थ.
१.तिल-तिल-छोटे-छोटे
२.खंड-टुकड़े
३असुर-असुर कुमार देव
४.भिडावे-लड़ते हैं
५.प्रचंड-भयानक दुःख
६.सिन्धु नीर-सागर के पानी
७.पण-पानी
२.खंड-टुकड़े
३असुर-असुर कुमार देव
४.भिडावे-लड़ते हैं
५.प्रचंड-भयानक दुःख
६.सिन्धु नीर-सागर के पानी
७.पण-पानी
भावार्थ: उन नार्कों मे नारकी एक दूसरे को दुख देते रहते हैं अतर्थ कुतो की भाँति हमेश आपस मैं लड़ते रहते हैं! वे एक- दूसरे के शरीर के टुकड़े- टुकड़े कर डालते हैं, त्थपि उनके शरीर बारॅम्बार पारें की भाँति बिखर कर फिर जूड जानते हैं! संक्लिष्ट परिणाम वेल अंबरीष आदि जाति के असुर कुमार देव पहले, दूसरे तथा तीसरे नरक तक जाकर वहाँ की तीव्र यातनाओ मे पड़े हुए नारकियों को अपने अवधिज्ञान के द्वारा परस्पर वेर बतलकर आठवाँ क्रूरता और कुतूहल से आपस मे लड़ातें हैं और स्वयं आनंदित होते हैं! उन नारकी जीवों को इतनी महान प्यास लगती हैं की मिल जाए तो पूरे महासागर का जल भी पी जाए, तथापि त्रिशा शांत न हों; किंतु पीने के लिए जल की एक बूँद भी नही मिलती!
Til-Til Karain Deh Ke Khand,Asur Bhiddavain Dusht Prachand;Situthu-Neer Tain Pyaas Na Jaay,Tau Pan Ek Na Boond Lahaay. pieces.
Word Meaning: Karain Deli Ke Khand-to chop the body into pieces. Astir-Fiendish youth- type of Celestial Bhiddaavain-incite to fight. Dusht-wicked. Prachand- fierce. Shzdhu-Neer Tahz-with the waters of the ocean. Pyaas Na Jaay-The thirst cannot be quenched. Pun-even then. EkNa Bound La/ay-not a drop of water is available.