बालपने में ज्ञान न लहो,तरुण समय तरुणीरत रहो,अर्ध मृतक सम बुढ़ा पनो,कैसे रूप लखै आपनो
शब्दार्थ१.ओर-अंत
२.लहो-ज्ञान नहीं रहा
३.तरुण-जवानी
४.तरुणी-जवान स्त्री
५.अर्ध मृतक-मरे के सामान
६.रूप-आत्मा स्वाभाव
७.लखे-पहचाने
२.लहो-ज्ञान नहीं रहा
३.तरुण-जवानी
४.तरुणी-जवान स्त्री
५.अर्ध मृतक-मरे के सामान
६.रूप-आत्मा स्वाभाव
७.लखे-पहचाने
भावार्थ मनुष्यगती मे भी यह जीव बाल्यावस्था मे विशेष ज्ञान प्राप्त नही कर पाया; योवानवस्था मे ज्ञान तो प्राप्त किया, किंतु स्त्री के मोह मे भुला रहा और वृधवस्था मे इंद्रियों की शक्ति कम हो गई अथवा मर्न्प्र्यन्त पहुँचे ऐसा कोई रोग लग गया की, जिससे अधमरा जैसा पड़ा रहा! इस प्रकार यह जीव तीनो अवस्थाओ मे आत्मस्वरूप का दर्शन न कर सका!
Baalapane Mein Gyaan Na Lahyau,Tarunna Samai Tarunnee-Rati Rahyau;Ardhamrutak-Sam Boodhaapanau,Kaise Roop Lakhai Aapanau.
Word Meaning: Baalapane Mein-in childhood, Gyaatz-true knowledge. Na Lahyau-did not acquire. Tarunna Samai-youth time. Tarumzee Rail Rahyau-remained engrossed in the sensual-pleasures with the spouse. Ardhamrutak- Sam-like half dead. Boodhaapanau-old age. Kaise-how, Roop-identity. Lakhai-to realize. Aapanatt-ownself.